मिठ्ठी गोबिन्दराम पब्लिक स्कूल में महान सपूत प्रेम रामचंदानी के शहादत दिवस पर भावपूर्ण श्रद्धाजंलि
26-Sep- 2017

दिनांक  26 सितम्बर 2017 

प्रेस विज्ञप्ति

मिठ्ठी गोबिन्दराम पब्लिक स्कूल में

महान सपूत प्रेम रामचंदानी के शहादत दिवस पर भावपूर्ण श्रद्धाजंलि

 

शूरवीर सपूत प्रेम रामंचदानी के द्वारा कहा गया प्रसद्धि उद्धरण - ‘‘मुझे अफसोस है कि अपने देश पर न्यौछावर करने के लिए मेरे पास सिर्फ एक ही जीवन है।’’  

 

          दिनाँक 26.09.2017 शहीद हेमू कालानी एज्युकेषनल सोसायटी द्वारा संचालित विद्यालय मिठ्ठी गोबिन्दराम पब्लिक स्कूल में संस्थान के प्रेरणा पुंज परम श्रद्धेय सिद्ध भाऊजी के पावन मार्गदर्षन में माँ भारती के शूरवीर सपूत प्रेम रामचंदानी, फ्लाइंग आॅफिसर, इंडियन एयरफोर्स के शहादत दिवस का आयोजन किया गया। 

          परम श्रद्धेय सिद्ध भाऊजी के पुनीत मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से आयोजित, इस श्रद्धा-सुमन अर्पण कार्यक्रम का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य, राष्ट्रप्रेम एवं शहीदों का सम्मान जैसे भावों से उन्हें अवगत कराना रहा, ताकि छात्रों में भी स्वदेश प्रेम की भावना बलवती हो सके तथा वे सैनिकों के बलिदानों से प्रेरित हो, अपने जीवन मंे देश भक्ति की भावना को और प्रबल बना सकें।

          इस अवसर पर कर्नल नारायण पारवानी जी ने शहीद सपूत प्रेम रामचंदानी जी के जीवन का विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि प्रेम रामचंदानी जी का जन्म 1941 में हुआ, यह बचपन से ही कुशाग्रबृद्धि, प्रभावशाली एवं राष्ट्रप्रेम से परिपूर्ण व्यक्तित्व के धनी रहे। साहसिक स्वभाव होने के कारण उन्होंने भारतीय सेना में फ्लाइंग आॅफिसर पद का चयन किया।

          सन 1965 में भारत-पाक युद्ध जो जिब्राल्टर प्लान के नाम से विख्यात हैं में इस जाँबाज सपूत को पाकिस्तान में घुसकर बम गिराने का आदेश मिला। जिसे उन्होंने पूर्ण करते हुए नौ बार पाकिस्तान की भूमि पर बम गिराने में सफलता प्राप्त की। किन्तु दसवें हमलें में पाक गोलाबारी से उनके एयरक्राफ्ट में आग लग गई जिसके कारण यह बहादुर सैनिक घायल हो गए। डाॅक्टरों के सतत् प्रयासों के उपरांत माँ भारती का यह वीर सैनिक 26 सितम्बर 1965 के दिन अमर शहादत को प्राप्त हुआ।

          इस राष्ट्रप्रेमी, शौर्यवान सैनिक के अंतिम क्षणों में कहे गए शब्द भारतीय सैनिकों के लिए आज भी अनुकरणीय एवं मिसाल बने हुए है। उन्होंने मृत्यु और जीवन से जूझते समय कहा ‘‘मुझे अफसोस है कि अपने देश पर न्यौछावर करने के लिए मेरे पास सिर्फ एक ही जीवन है।’’  1965 भारत-पाक युद्ध में 3000 (तीन हजार) भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। जिसमें सिंध समाज के इस वीर सपूत को भी शहादत मिली, वे उस समय मात्र चैबीस वर्ष के थे। उनके अविस्मरणीय बलिदान को सम्मान देते हुए भोपाल के संत हिरदाराम नगर में, मुंबई के ताज होटल पास वाला मार्ग एवं अन्य शहरों में इनके नाम पर मार्ग भी स्थापित किए गए है।

          कर्नल पारवानी जी ने छात्रों से अपील की कि वे देश प्रेम को अपने जीवन में प्राथमिकता दें तथा सदैव अनुशासित रहकर अपने दायित्वों का अनुपालन करते हुए अपने भावी जीवन में राष्ट्रप्रेम को सर्वोपरि स्थान दें।

          विद्यालय प्राचार्य डाॅ. अजयकंात शर्मा जी ने श्रृद्धेय सिद्ध भाऊजी एवं कर्नल नायारण पारवानी जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रेरणास्पद एवं जीवंत उदाहरण समाज के बच्चों के मन में मातृप्रेम एवं राष्ट्रप्रेम की भावना को विकसित करने हेतु जीवंत मिसाल है। 

          इसी के साथ विद्यालय परिवार द्वारा शहीद वीर प्रेम रामचंदानीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

 


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