अभिप्रेरक सत्र का आयोजन
30-Jun- 2018
दिनांक 29.06.2018
प्रेस विज्ञप्ति
मिठी गोबिन्दराम पब्लिक स्कूल में अभिप्रेरक सत्र का आयोजन

दिनांक 29/06/2018, शहीद हेमू कालानी एज्युकेषनल सोसायटी द्वारा संचालित विद्यालय मिठी गोबिन्दराम पब्लिक स्कूल में प्रेरणा स्त्रोत परम श्रद्धेय सिद्ध भाऊजी के पावन सानिध्य में कक्षा पाँचवी के विद्यार्थियों हेतु अभिप्रेरक सत्र का आयोजन नवनिध सभागार में किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देष्य ‘‘छात्र  अपने माता-पिता एवं गुरूजनों के कैसे प्रिय बने?’’ रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती, माँ भारती एवं ब्रह्यलीन संत हिरदाराम साहिब जी के चित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

संस्थान के प्रेरणापुंज परम श्रद्धेय सिद्ध भाऊजी ने समस्त छात्रों को संबोधित करते हुए वर्तमान समय की निम्नस्तरीय दैनिक दिनचर्या के संदर्भ में सचेत किया। उन्होंने छात्रों से कहा कि किस प्रकार आप लोग भौतिक चकाचैंध में कई आकर्षणों में बंधते जा रहे है, जिससे आपका सम्पूर्ण व्यक्तित्व पतन की ओर अग्रसर हो रहा है। छात्रों को विद्यार्थी जीवन में नियमित दिनचर्या का पालन करने का महत्व बताते हुए उन्होंने विद्या धन को मानव जीवन की सर्वश्रेष्ठ धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि इस जीवन की सार्थकता ज्ञानार्जन से परिपूर्ण होती है। अतः प्रत्येक विद्यार्थी को गंभीरता के साथ विद्यार्जन हेतु प्रयासरत रहना ही चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य के प्रति छात्रों को सचेत करते हुए सदैव जागरूक बनने की प्रेरणा देते हुए पौष्टिक एवं सुपाच्य आहार लेने की बात की। पौष्टिक आहार की उपयोगिता बताते हुए उन्होंने बच्चों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिए प्रेरित किया। सदैव माता-पिता एवं गुरूजनों के प्रति ईमानदार बनें तथा उनके प्रति श्रद्धा भाव बनाए रखेें और नियमित रूप से माता-पिता के चरण स्पर्श करें ताकि आप कभी भी दिशाहीन न हो सकें। धरती पर जन्म लेने के लिए माता पिता का साधुवाद माने तथा उच्चतम जीवन जीने के लिए ईश्वर की साधना करें।
विद्यालय के प्राचार्य डाॅ. अजयकांत शर्मा जी ने अपने उद्बोधन मंें छात्रों को संबोधित करते हुए मुख्य रूप से कहा कि हमे सदैव सच का पालन करना चाहिए। निर्भीक होकर सच को कहे, भले ही हमने गलती की हो किन्तु सच्चाई पूर्वक उसे स्वीकारें, तथा सुधारने का निरन्तर प्रयास करें क्योंकि प्रयास सदैव ही सफल होता है। 
विद्यालय काॅर्डिनेटर श्रीमती मिनी नायर ने अपने वक्तव्य में छात्रों को प्रतिदिन की महत्वपूर्ण बातों से अवगत कराया जिसमें सुबह उठकर धरती माता के पैर छूना, निरीह पक्षियों को दाना-पानी देना, नियमित रूप से विद्यालय आना, मन लगाकर पढ़ाई करना, घर का बना हुआ खाना खाना, माता पिता के पैर छूना, डिजिटल दुनिया से दूरी बनाना जिससे हमें उसकी आदत न हो। उन्होंने बच्चों से कहा कि भाऊजी ने जो गुल्लक बच्चों को दी है, उसमें बचत की आदत बनायें और जरूरतमंदो की सेवा करें।
विद्यालय शिक्षिका श्रीमती कीर्ति राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि छात्रों को अपने मन को नियंत्रण में रखना चाहिए एवं मन के रिमोट कंट्रोल को सदैव अपने पास रखें। उन्होंने ‘पुल पर पानी के बहाव’ विचार के माध्यम से माता पिता पर सुदृढ़ विश्वास को बढ़ाने की प्रेरणा दी।
अनुशासन व्यवस्था बनाये रखने में खेल विभाग के श्री आलोक शर्मा, श्री हरीश असेरी, श्री चन्द्रप्रकाश एवं संगीत विभाग के शिक्षक श्री भूपेश पाठक द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।
कार्यक्रम का कुषल संचालन विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती दुर्गा मिश्रा एवं आभार विद्यालय शिक्षिका श्रीमती निशा सिंह के मार्गदर्शन में कक्षा पाँचवी के छात्र वैभव लखानी द्वारा व्यक्त किया गया।



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